सावन को आने दो
गीत: तुझे देख कर जग वाले पर यकीन नहीं क्यों कर होगा
तुझे देख कर जग वाले पर यकीन नहीं क्यूं कर होगा
जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा
वो कितना सुन्दर होगा
वो कितना सुन्दर होगा
तुझे देखने को मैं क्या हर दर्पण तरसा करता है
ज्यों तुलसी के पिरवा को हर आंगन तरसा करता है
हर आंगन तरसा करता है
अपना रूप दिखाने को ... हो हो ओ हो
अपना रूप दिखाने को तेरे रूप में खुद ईश्वर होगा
जिसकी रचना ...
राग रंग रस का संगम आधार तू प्रेम कहानी का
मेरे प्यासे मन में यूं उतरी ज्यों रेत में झरना पानी का
ज्यों रेत में झरना पानी
अंग अंग तेरा रस की गंगा ... हो हो ओ हो
अंग अंग तेरा रस की गंगा रूप का वो सागर होगा
जिसकी रचना ...
गीत: तुझे देख कर जग वाले पर यकीन नहीं क्यों कर होगा
तुझे देख कर जग वाले पर यकीन नहीं क्यूं कर होगा
जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा
वो कितना सुन्दर होगा
वो कितना सुन्दर होगा
तुझे देखने को मैं क्या हर दर्पण तरसा करता है
ज्यों तुलसी के पिरवा को हर आंगन तरसा करता है
हर आंगन तरसा करता है
अपना रूप दिखाने को ... हो हो ओ हो
अपना रूप दिखाने को तेरे रूप में खुद ईश्वर होगा
जिसकी रचना ...
राग रंग रस का संगम आधार तू प्रेम कहानी का
मेरे प्यासे मन में यूं उतरी ज्यों रेत में झरना पानी का
ज्यों रेत में झरना पानी
अंग अंग तेरा रस की गंगा ... हो हो ओ हो
अंग अंग तेरा रस की गंगा रूप का वो सागर होगा
जिसकी रचना ...
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