Saturday, February 20, 2016

जाल - गीत : सुन जा दिल की दास्तां (हेमंत कुमार)

जाल 
गीत : सुन जा दिल की दास्तां 
हेमंत कुमार

ये रात ये चाँदनी फिर कहाँ
सुन जा दिल की दास्ताँ

पेड़ों की शाखों पे सोई-सोई चाँदनी
तेरे खयालों में खोई-खोई चाँदनी
और थोड़ी देर में, थक के लौट जाएगी
रात ये बहार की, फिर कभी न आएगी
दो एक पल और है ये समां
सुन जा...

लहरों के होंठों पे धीमा-धीमा राग है
भीगी हवाओं में ठंडी-ठंडी आग है
इस हसीन आग में, तू भी जलके देख ले
ज़िंदगी के गीत की, धुन बदल के देख ले
खुलने दे अब धड़कनों की ज़बाँ
सुन जा...

जाती बहारें हैं, उठती जवानियाँ
तारों के छाँव में कहले कहानियाँ
एक बार चल दिये, गर तुझे पुकार के
लौटकर न आएंगे, क़ाफ़िले बहार के
आजा अभी ज़िंदगी है जवाँ
सुन जा...

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