Thursday, February 25, 2016

जीने की राह - गीत: चंदा को ढ़ूंढ़ने सभी तारे निकल पडे

जीने की राह
गीत: चंदा को ढ़ूंढ़ने सभी तारे निकल पडे

चंदा को ढ़ूंढ़ने सभी तारे निकल पडे
गलियों में वो नसिब के मारे निकल पडे

उनकी नजर को जिसने नजारा चुरा लिया
उनके दिलों का जिसने सहारा चुरा लिया
उस चोर की तलाश में सारे निकल पडे

चंदा को ढ़ूंढ़ने सभी तारे निकल पडे
गलियों में वो नसिब के मारे निकल पडे

गम की अंधेरी रात में जलना पडा उन्हे
फूलों पे बदले काटों पे चलना पडा उन्हे
धरती पे जब गगन के दुलारे निकल पडे

चंदा को ढ़ूंढ़ने सभी तारे निकल पडे
गलियों में वो नसिब के मारे निकल पडे

उनकी पूकार सुन के ये दिल डगमगा गया
हम को भी कोई बिछडा हुआ याद आ गया
भर आई आंख आँसू हमारे निकल पडे

चंदा को ढ़ूंढ़ने सभी तारे निकल पडे
गलियों में वो नसिब के मारे निकल पडे

No comments:

Post a Comment